Skip to main content

रातों को नींद नही दिन को चैन नही (भाग-2)

                                       रातों को नींद नही दिन को चैन नही                                                                                                                                                                                          मित्रों , पिछले ब्लॉक में कर्म पर बात हो रहा था,उसी विषय को आगे ले चलते है, आप सब को यह ज्ञात होगा कि श्रीमद्भगवत गीता का उपदेश महाभारत के युद्ध के प्रारम्भ में हो रहा था। आप कल्पना कर सकते है कि कोई योद्धा अगर युद्ध के मैदान में आकर युद्ध करने से मना करने लगे तो क्या स्थिति पैदा हो जाएगी ? इसी प्रकार हमारे जीवन में भी कई बार दूविधा की स्थिति आ जाती है ,बहुत से कार्य ऐसे होते हैं जिसमें हम सभी काफ़ी गहराई से सोच -बिचार को मजबूर हो जाते हैं और सोचना भी चाहिए परन्तु आप को जब भी इस तरह की स्थिति का सामना करना हो तो सबसे पहले आप जिस किसी को भी अपना इष्ट या  भगवान मानते है और जिस भी रूप या स्वरूप में आपका ध्यान लगता हैं एक बार उसे याद करें और अपने भीतर ही भीतर उसके सामने प्रश्न करें ,मैं दावे के साथ कहता हू कि आप को जो भी प्रतिउत्तर मिलेगा आपके लिए वही मार्ग अतिउत्तम होगा।इसका कारण भी आप जान लें आप स्वयं में एक संवेदनशील एवं जीवित पिंड है जो सत्य और असत्य का बहुत सुन्दर मिश्रण से निर्मित है ,सत्य वह जिसकी उपस्थिति मात्र ही आप का जीवन है और जिसकी अनुपस्थिति मात्र से सब कुछ समाप्त अर्थात मृत्यु। जिसके होने से सारी संवेदनाएं है ,जिसका होना आप का होना है और जिसे हिन्दू प्रभु श्री राम ,भगवान कृष्ण, ईसाई लोग प्रभु इशू, मुस्लिम अल्ला और तमाम धर्मो को मानने वाले विभिन्न नमो से पुकारते है आप, हम सभी ईश्वर रूपी सत्य के अंश (छोटे से भाग ) द्वारा निर्मित है। उसी अंश को हम सब अंतरात्मा ,शोल ,रूह और कई नामो से जानते है। जो पूरे जीवन में कभी भी सामान्यतया अपनी उपस्थिति हमें प्रदर्षित नहीं करता लेकिन जब भी हम कभी किंकर्तव्यविमूढ़ हो जाते है तो आवाज़ लगाने पर हमें सही मार्ग दर्शन देता है, जो हम सभी के लिए अतिउत्तम होता है।  अतः जब कभी भी आप को कोई चिंता सताने लगे या कोई मुश्किल विषय आपके जीवन  में गंभीर विचार का कारण बनने लगे तो आप इस प्रकार प्रार्थना कर समाधान पा सकते है।  वैसे भी आवश्यक चिंताए जीवन ऊर्जा का नाश ही करती है।आप सभी स्वयं में प्रसन्न रहने का प्रयास करे ,जो भी संयोग बनता हो उसमें सन्तुष्ट रहने का प्रयास करें और आगे के लिए अपने इष्ट से प्रार्थना करते हुए स्वयं संघर्ष करें।

                                आपका जीवन सुखमय हो। इसी मंगल कामना के साथ  🙏🙏

                                                           




                                                                                                                                                                                                                                                      

Comments

Popular posts from this blog

विचारों की शक्ति

विचारों की शक्ति                                                                      विचारों की शक्ति                       मित्रों ,इस लेखन को पढ़ने पर सबसे पहले हमारे मन में प्रश्न आता हैं कि विचार हम किसे कहते हैं ?  मित्रों, आप सब ने महसूस किया होगा कि हमारा मस्तिष्क निरंतर किसी न किसी परिकल्पना में लगा रहता है या हम कह सकते है कि हम सभी के मनस पटल पर निरंतर कुछ ख्याली तरंगे उठती रहती हैं। हमारे मन में समय ,परिस्थिति और आवश्यकता के अनुरूप कुछ न कुछ ख़्याल हर समय चलते रहते है जिसमे से बहुत से ख़्याल अर्थात सोच समय, परिस्थिति और आवश्यकताओ के साथ ही समाप्त हो जाते है परन्तु कुछ सोच हमारे मन मस्तिष्क में बने रह जाते है और उन सोचों का हमारे मन पर इतना गहरा प्रभाव होता है कि हमारा मस्तिष्क उन्ही को आधार बनाकर जीवन के छोटे-बड़े फैसले लेने लगता है उन्हे...

सफलता (कबीर साहब के शब्दों में ) भाग -1

  सफलता                                          (कबीर साहब के शब्दों में ) भाग -1                                                                                                                                   मित्रों, हम मानव, इस धरती पर उत्पन्न होने वाले प्राणियों में सर्वश्रेठ क्यों कहे जाते हैं ? इसके पीछे कारण है कि प्राकृतिकऔर कृत्रिम परिवर्तनो को झेलने एवं उन पर जीत हासिल करने की जो क्षमता हम मनुष्यों में है अन्य किसी प्राणी में नही है। हम मनुष्यों में प्रकृति ने इतनी खुबियाँ भरी हैं जो हमें हर तरह की मुश्किलों का स...

VARANSI

                                                                                        वराणसी                                                                             मित्रों, जो लोग वराणसी के बारे में ज्यादा कुछ नही जानते है वह भी यह जानते है और मानते हैं कि भारत देश इस पृथ्वी के उस भू-खण्ड का नाम है, जिसकी मिट्टी में सजीव रूप में प्रगट होने वाले प्राणियों का जीवन,अति संवेदना और अनंत संभावना से परिपूर्ण होता है। भारत के इसी भू-खण्ड पर पूर्वोत्तर में प्रवाहित होने वाली पवित्र नदी गंगा के तट पर लाखों वर्ष पूर्व की मानव सभ्यता का वाहक एक नगर है, जिसे भारत का धार्मिक हृदयास्थल य...