Skip to main content

खुद से लडिये और आगे बढिये (भाग-1)

                                      खुद से लडिये और आगे बढिये (भाग-1)


       मित्रों आज कल पूरी दुनिया जिस तरह से असहिष्णुता फैलती जा रही इसको देखकर हम यह निश्चित रूप से कह सकते है कि यह भूमण्डलीय समाज के विकास का परिचायक नही हो सकता।एक-दो ही नही विश्व के लगभग सभी देशों में यद-कदा यह  देखने  को और सुनाने  को  मिल जाता है। आज  के  समाचार पत्र एवं इलेक्ट्रॉिनिक समाचार इसके प्रमाण दे रहे हैं। क्या आप ने कभी विचार किया है कि मनुष्य इतना संवेदनशील और ज्ञानी होते हुए भी क्यों युद्ध की स्थिति में आ जाता है?क्या आप को भी लगता है कि मनुष्य एक युद्धक प्राणी है ? यह सब प्रश्न आप के मन में जरूर आने चाहिए क्यों कि हम-आप सभी मनुष्य होने के साथ-साथ आज की इस दुनिया के निर्माता भी है एवं संचालक भी।आज की कृत्य कल आने वाली पीढ़ियों का इतिहास बनेगी परन्तु जब वह देखेंगे और पढ़ेंगे की मेरे पुर्व जनो ने आपस में युद्ध किया था तो हम पर हॅसगें।अतः हम सभी को किसी भी प्रकार के युद्ध को बढ़ाव नही देना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण है कि अगर लड़ना हो तो खुद के अवगुणों एवं बुराइयों से लड़ना और उनपर विजय प्राप्त करने की कोशिश करनी चाहिए। अंततः खुद से लडिये और आगे बढिये।जीवन परिस्थित जन्य है परन्तु जीवन जीना एक कला है जिसे सीखना पड़ता है। ........ क्रमशः 

Comments

Popular posts from this blog

विचारों की शक्ति

विचारों की शक्ति                                                                      विचारों की शक्ति                       मित्रों ,इस लेखन को पढ़ने पर सबसे पहले हमारे मन में प्रश्न आता हैं कि विचार हम किसे कहते हैं ?  मित्रों, आप सब ने महसूस किया होगा कि हमारा मस्तिष्क निरंतर किसी न किसी परिकल्पना में लगा रहता है या हम कह सकते है कि हम सभी के मनस पटल पर निरंतर कुछ ख्याली तरंगे उठती रहती हैं। हमारे मन में समय ,परिस्थिति और आवश्यकता के अनुरूप कुछ न कुछ ख़्याल हर समय चलते रहते है जिसमे से बहुत से ख़्याल अर्थात सोच समय, परिस्थिति और आवश्यकताओ के साथ ही समाप्त हो जाते है परन्तु कुछ सोच हमारे मन मस्तिष्क में बने रह जाते है और उन सोचों का हमारे मन पर इतना गहरा प्रभाव होता है कि हमारा मस्तिष्क उन्ही को आधार बनाकर जीवन के छोटे-बड़े फैसले लेने लगता है उन्हे...

सफलता (कबीर साहब के शब्दों में ) भाग -1

  सफलता                                          (कबीर साहब के शब्दों में ) भाग -1                                                                                                                                   मित्रों, हम मानव, इस धरती पर उत्पन्न होने वाले प्राणियों में सर्वश्रेठ क्यों कहे जाते हैं ? इसके पीछे कारण है कि प्राकृतिकऔर कृत्रिम परिवर्तनो को झेलने एवं उन पर जीत हासिल करने की जो क्षमता हम मनुष्यों में है अन्य किसी प्राणी में नही है। हम मनुष्यों में प्रकृति ने इतनी खुबियाँ भरी हैं जो हमें हर तरह की मुश्किलों का स...

VARANSI

                                                                                        वराणसी                                                                             मित्रों, जो लोग वराणसी के बारे में ज्यादा कुछ नही जानते है वह भी यह जानते है और मानते हैं कि भारत देश इस पृथ्वी के उस भू-खण्ड का नाम है, जिसकी मिट्टी में सजीव रूप में प्रगट होने वाले प्राणियों का जीवन,अति संवेदना और अनंत संभावना से परिपूर्ण होता है। भारत के इसी भू-खण्ड पर पूर्वोत्तर में प्रवाहित होने वाली पवित्र नदी गंगा के तट पर लाखों वर्ष पूर्व की मानव सभ्यता का वाहक एक नगर है, जिसे भारत का धार्मिक हृदयास्थल य...