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जीवन का कठोर सत्य

                                                       

                                                               जीवन का कठोर सत्य  (भाग - 4)
               

            7. आप जब कुछ नही कर रहे होते है तो भी आप कुछ तो कर रहे होते ,इसको कुछ इस प्रकार समझे कि भगवान कृष्ण गीता के उपदेश में अर्जुन से कहते है कि हे अर्जुन अगर इस संसार में जीव कुछ भी नही करता ,इसका यह मतलब यह नही है की वह निष्क्रिय है ,जीव की इन्द्रियाँ (आँख ,नाक ,कान ,श्वास और स्पर्श इत्यादि  का काम करने वाले अंग) ईश्वर की माया के अधीन होने के कारण प्राकृतिक रूप से जीवन भर क्रिया शील होता है।                                                                                                                                                                                     इस विषय पर आप को और गहराई में ले चलते है हम जब कुछ भी नही कर रहे होते है तो भी हमारे जीवन में समय सदैव चलता रहता है ,हमारे शरीर पर काम कर ने वाली गुरुत्त्वाकर्सन की शक्ति सदैव कार्यरत है,और पूरी पृथ्वी ही नही हममें से बहुत से लोग जानते है कि इस ब्रह्माण्ड में जितने भी पदार्थ /पिण्ड  है सब के सब गतिशील है। इसलिए हम परिणाम शून्य कर्म तो कर सकते है पर निष्क्रिय नहीं रह सकते।                                                                      अतः हमे कभी भी निष्क्रिय नही रहना चाहिए ,क्यों कि चाहते हुए भी हम निष्क्रिय नही रह सकते।                           इस विषय में मैं यह भी कहना चाहूँगा जब आप कुछ अच्छा नही करते है तो आप कुछ बुरा जरूर करेंगे। इसलिए जब भी हमें आपने जीवन में समय मिले हमें कुछ अच्छा करने का प्रयास करना चाहिए।.................. क्रमशः                                                                                 

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