आइये जीवन को आनन्द बनाये 1. अपने को प्राणी मात्र से ज्यादा न समझे ,जिस प्रकार हमारे आसपास इस समस्त जगत में तमाम प्राणी अपना जीवन अपने स्वभाविक रूप से निर्वहण कर रहे है ,उसी प्रकार अपने नित्य क्रिया- कलापो में हमें भी सामान्य तरीके से ही जीना चाहिए। 2. हमे यह याद रखना चाहिए कि हमारे जीवन का प्रारंभ अर्थात हमारा जन्म हमारे अपने चाहने से नही हुआ है ,हमारा बचपन हमारे अपने कर्मो से नही सफल हुआ ,हमने जो भी शिक्षा -संस्कार पाए उसमे हमारे अपने कर्मो की सहभागिता भी परिस्थियो ने ही तय किया ,अब जा कर जब हमें जीवन में कुछ करने का समय आया तो सबकुछ हमारे अनुरूप कैसे हो जायगा। इस स्थिति में हमें धैर्य से काम लेना चाहिए। 3. हम मनुष्य है ,समस्त जगत के प्राणियों में श्रेष्ठ है और अपने जीवन का निर्वाह करने के साथ -साथ कुछ सामाजिक जिम्मेदारिया भी है इसलिए अपनी इच्छा से अपनी परिस्थियों के अनुरूप आप को अपने जीवन लक्ष्य भी तय कर लेने चाहिए। इसमे यह बात महत्वपूर्ण है जिसे मै दुबारा कहना चाहुँगा कि आप अपने जीवन लक्ष्य को अपने परिस्थियों के अनुरूप ही चुने, क्यों कि गलती यही होती है जो हमें बाद में असफलता के रूप में हमारे सामने आ जाती है या सफलता के लिए चुनवती पूर्ण संघर्ष दे जाती है। यहां यह बात समझने की है कि अगर प्रथम बार ही हमारा चुनाव गलत हो गया तो ''सिर मुड़ते ओले पड़ने ''वाली बात हो जाएगी और यह असफलता हमें ज्यादा तकलीफ़ देगी। अतः हमें आपने जीवन लक्ष्य को निर्धारित करते समय खूब समय देना चाहिए। 4. अपने जीवन लक्ष्य का निर्धारण करते समय यदि एक दिन नही एक सप्तह भी लगता है तो लगाए ,अगर तब भी आप को लगता है की अभी कुछ कमी है तो और समय दे ,एक माह या एक वर्ष भी लगता है तो भी ठीक है परन्तु जब आप ने लक्ष्य बना लिया तो फिर तबतक आराम कहाँ जबतक कि लक्ष्य हासिल न हो जाय। 5. जब भी सफलता मिले उसका जश्न मनाये। 6. जीवन में सफलता का जश्न मनाना न भूले।
विचारों की शक्ति विचारों की शक्ति मित्रों ,इस लेखन को पढ़ने पर सबसे पहले हमारे मन में प्रश्न आता हैं कि विचार हम किसे कहते हैं ? मित्रों, आप सब ने महसूस किया होगा कि हमारा मस्तिष्क निरंतर किसी न किसी परिकल्पना में लगा रहता है या हम कह सकते है कि हम सभी के मनस पटल पर निरंतर कुछ ख्याली तरंगे उठती रहती हैं। हमारे मन में समय ,परिस्थिति और आवश्यकता के अनुरूप कुछ न कुछ ख़्याल हर समय चलते रहते है जिसमे से बहुत से ख़्याल अर्थात सोच समय, परिस्थिति और आवश्यकताओ के साथ ही समाप्त हो जाते है परन्तु कुछ सोच हमारे मन मस्तिष्क में बने रह जाते है और उन सोचों का हमारे मन पर इतना गहरा प्रभाव होता है कि हमारा मस्तिष्क उन्ही को आधार बनाकर जीवन के छोटे-बड़े फैसले लेने लगता है उन्हे...
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